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प्रश्न : क्या प्रारब्ध के कारण हम *सभी कर्म* करते हैं या उसके अलावा भी कर्म करते हैं? यदि करते हैं तो उस अन्य कर्म को क्या कहते हैं ?

आद्यंतीं दैव मध्ये पुरुषु। ब्रह्मविद्या में आये उपरोक्त सूत्र का अभिप्राय है कि परमेश्वर तंत्र जीव को किसी न किसी माध्यम से — किसी अवतार या किसी अन्य निमित्त के द्वारा — ज्ञान पहुँचाता रहता है। उस ज्ञान का उपयोग मनुष्य रूपी जीव कैसे करता है, यह उसकी स्वतंत्रता है। परंतु वह जो कुछ करतापढ़ना जारी रखें “प्रश्न : क्या प्रारब्ध के कारण हम *सभी कर्म* करते हैं या उसके अलावा भी कर्म करते हैं? यदि करते हैं तो उस अन्य कर्म को क्या कहते हैं ?”

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प्रश्न : भगवान क्या करते हैं और क्या नहीं करते ?

इस कहानी को पढ़कर आप समझ जाएंगे कि भगवान क्या करते हैं, क्यों❓️ करते हैं और क्या नहीं करते हैं। एक करोड़पति को करोड़ों का घाटा हुआ व्यक्ति भगवान को नहीं मानता था परंतु मरता क्या न करता भगवान के पास प्रार्थना करने पहुंच गया कि शायद भगवान के पास कोई हल मिल जाए। दुःखपढ़ना जारी रखें “प्रश्न : भगवान क्या करते हैं और क्या नहीं करते ?”

भगवान से क्या मांगें ?

क्या भगवान हमारे गुलाम हैं? क्या भगवान हमारे सस्ते सौदे के लिए बैठे हैं? हम सभी दिन-रात भगवान से मांगने में ही लगे रहते हैं। हमारी कुछ इच्छा पूरी हो जाती है और कुछ रह जाती है। हम कितने लालची है – 1 किलो मिठाई का डिब्बा लेकर मंदिर जायेंगे और 1 लाख मांगेंगे लेकिनपढ़ना जारी रखें “भगवान से क्या मांगें ?”

ब्राह्मण शूद्रों को अछूत मानते थे, आइये जानते हैं इसकी असलियत

जब ब्राह्मणों के घर ब्रह्मभोज होता था तो उनके यहाँ जो दोना पत्तल लगता था वो मुसहर (महादलित) लेके आता था, जो पानी भरा जाता था वो कहार भरते थे, जो मिट्टी का बर्तन यूज होता था वो कुम्हार बनाते थे। जो आवश्यक कपड़े लगते थे वो जुलाहे के यहाँ से आते थे, जो जनेऊपढ़ना जारी रखें “ब्राह्मण शूद्रों को अछूत मानते थे, आइये जानते हैं इसकी असलियत”

कान्हा का छठी उत्सव की बधाई

भाद्रपद कृष्ण सप्तमी को श्रीजी में प्रभु की छठी का उत्सव मनाया जायेगा. प्रभु श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव एक वर्ष तक चला और प्राकट्य के छठे दिन पूतना राक्षसी आयी (जिसका प्रभु ने उद्धार किया था).इस आपाधापी में सभी व्रजवासी, यशोदाजी नंदबाबा, लाला कन्हैया की छठी पूजन का उत्सव भूल गयीं.अगले वर्ष जब लालापढ़ना जारी रखें “कान्हा का छठी उत्सव की बधाई”

प्रभु की प्राप्ति किसे होती है..?

एक सुन्दर कहानी है :–एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य अपने इष्ट देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ और याद करता था। एक दिन इष्ट देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा — “राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हैं। बोलो तुम्हारी कोईपढ़ना जारी रखें “प्रभु की प्राप्ति किसे होती है..?”

शिव और ब्रह्मा दोनों के संताने हैं। भगवान विष्णु की कोई संतान क्यों नहीं है?

उत्तर भगवद गीता में है अध्याय 14.3 मम योनिर्महद् ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् |सम्भव: सर्वभूतानां ततो भवति भारत || 3||सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तय: सम्भवन्ति या: |तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रद: पिता || 4|| अनुवाद: कुल भौतिक पदार्थ, प्राकृत, गर्भ है। मैं इसे व्यक्तिगत आत्माओं के साथ संस्कारित करता हूं, और इस प्रकार सभी जीवित प्राणी पैदा होते हैं।पढ़ना जारी रखें “शिव और ब्रह्मा दोनों के संताने हैं। भगवान विष्णु की कोई संतान क्यों नहीं है?”

मनुष्य न चाहते हुए भी कौन-सी शक्ति से प्रेरित होकर अनुचित कार्य कर बैठता है?

अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुष:।अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय बलादिव नियोजित:।। भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तर दिया–पाप होने का कारण कामना है। भोग भोगने की कामना, पदार्थों के संग्रह की कामना, रुपया, मान-बड़ाई, नीरोगता, आराम आदि की चाहना ही सम्पूर्ण पापों और दु:खों की जड़ है। रामचरितमानस (सुन्दरकाण्ड, ३८) में गोस्वामी तुलसीदासजी कहते हैं काम क्रोध मद लोभपढ़ना जारी रखें “मनुष्य न चाहते हुए भी कौन-सी शक्ति से प्रेरित होकर अनुचित कार्य कर बैठता है?”

सोमरस कोई मदरा शराब नही है

सनातन धर्म में सोमरस का आशय मदिरा नही है ना ही सोमरस नशीला पदार्थ है,,, “देवता शराब नही पीते थे” सोमरस सोम के पौधे से प्राप्त था , आज सोम का पौधा लगभग विलुप्त है , शराब पीने को सुरापान कहा जाता था , सुरापान असुर करते थे , ऋग्वेद में सुरापान को घृणा केपढ़ना जारी रखें “सोमरस कोई मदरा शराब नही है”

प्रश्न : बहुत बार कहा जाता है कि पिछले जन्म के कर्म का फल है, तो जो जन्म हमें याद ही नहीं उसकी सजा हमको क्यों मिलती है, सजा तो सुधार के लिए होती है?

आपका सोचना अपनी जगह ठीक हो सकता है पर यदि आप चोरी करके भूल जाओ तो सजा के पात्र रहोगे या नहीं? आपने किसी को सताया और आपके अच्छे दिन चल रहे हैं तो जाहिराना तौर पर भूल ही जाओगे पर वह निष्पक्ष निर्विकार परमात्मा आपके भूलने या याद रखने का मोहताज नही वह अपनापढ़ना जारी रखें “प्रश्न : बहुत बार कहा जाता है कि पिछले जन्म के कर्म का फल है, तो जो जन्म हमें याद ही नहीं उसकी सजा हमको क्यों मिलती है, सजा तो सुधार के लिए होती है?”

प्रश्न : भगवान हमें मनचाही चीज़े क्यों नहीं देते हैं ?

भगवान किसी को कुछ नहीं देते। बस वह अपने भक्त को ही कुछ अलग से देते हैं वह भी पूरी तपस्या व परीक्षणों के बाद। लेना देना पाना खोना अपने कर्मों से ही संभव होता है। एक कहानी सुन लीजिए।🙂 एक व्यक्ति पैदल जा रहा था । जब चलते चलते थक गया तो भगवान सेपढ़ना जारी रखें “प्रश्न : भगवान हमें मनचाही चीज़े क्यों नहीं देते हैं ?”

प्रश्न : प्राचीन काल में ऋषि मुनि तपस्या करते हुए हजारों साल कैसे जी जाते थे ?

मैं इसी कलयुग की एक छोटी सी कहानी सुनाता हूँ महान संत ज्ञानेश्वर महराज की, जिन्होंने योग के बल पर सैकड़ो साल जीने वाले चांगदेव का अभिमान भंग किया था। चांगदेव महाराज सिद्धि के बलपर १४०० वर्ष जीए थे ।उन्होंने मृत्यु को ४२ बार लौटा दिया था उन्हें प्रतिष्ठा का बडा मोह था । उन्होंपढ़ना जारी रखें “प्रश्न : प्राचीन काल में ऋषि मुनि तपस्या करते हुए हजारों साल कैसे जी जाते थे ?”

प्रश्न : मानसिक पूजा का क्या महत्व है ?

मानसिक पूजा में शारीरिक गतिविधियों के स्थान पर मानसिक प्रयत्न किए जाते हैं । शरीर को भौतिक रूप से एक ही स्थान में स्थिर कर और कल्पना को प्रखर बनाकर वह सारी क्रियाएं जो शारीरिक तौर पर की जाती वह सारी मानसिक तौर पर संपन्न की जाती है और उसी भाव का प्रगाढ़ अनुभव कियापढ़ना जारी रखें “प्रश्न : मानसिक पूजा का क्या महत्व है ?”

प्रश्न : माना राम चन्द्र जी भगवान थे, तो फिर सीता जी का पता क्यों नहीं लगा पाएं ?

बहुत ही तार्किक प्रश्न है। इसका जवाब मैं आपको एक कहानी के द्वारा देना चाहूंगा।जो की इस प्रकार है: मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सहारनपुर, बुंदेलसहर (उत्तरप्रदेश) में दर्जनों मेडिकल कॉलेज, डिग्री कॉलेज,विद्यालय, अस्पताल हैं जिनके नामों के आगे महात्मा लुटेरी सिंह लगा है हमें लगता था ये हर कॉलेज,विद्यालय, अस्पताल के नाम के आगे महात्मा लुटेरीपढ़ना जारी रखें “प्रश्न : माना राम चन्द्र जी भगवान थे, तो फिर सीता जी का पता क्यों नहीं लगा पाएं ?”

प्रश्न: ईश्वर और हमारे बीच अक्सर कौन आ जाता है ?

आप अपने घर की खिड़की के शीशे में से जब बाहर की तरफ देखते हो तो आपको बाहर सड़क पर दौड़ती हुई कारें बाईक, हाथों में हाथ थामे हुए सैर करते हुए प्रेमी युगल बिलकुल साफ़ नजर आ रहे होते हैं। जबकि बैठने से पहले आपकी किसी विशेष व्यक्ति या वस्तु को देखने की कोईपढ़ना जारी रखें “प्रश्न: ईश्वर और हमारे बीच अक्सर कौन आ जाता है ?”

प्रश्न : मैं अपने बचपन से ही बहुत पूजा पाठ करता रहा हूँ पर मेरे जीवन में कष्ट और दूख के अलावा कुछ आया ही नहीं, तो क्या मेरी श्रद्धा में कमी रह गई या प्रारब्ध का दोष ज्यादा है ?

देखिए आप जैसे लोगो के लिए भगवान ने एक विशेष और विलक्षण बात कही है। इसे बार बार पढ़िए, दोहराइये, समझिए, इसका मनन कीजिये- भगवान कहते है कि- यस्याहमनुगृह्णामि हरिष्ये तद्धनं शनैः। ततोऽधनं त्यजन्त्यस्य स्वजना दुःखदुःखितम् ॥ अर्थार्त- जिस पर मैं कृपा करता हूँ, उसका सब धन धीरे-धीरे छीन लेता हूँ। जब वह निर्धन होपढ़ना जारी रखें “प्रश्न : मैं अपने बचपन से ही बहुत पूजा पाठ करता रहा हूँ पर मेरे जीवन में कष्ट और दूख के अलावा कुछ आया ही नहीं, तो क्या मेरी श्रद्धा में कमी रह गई या प्रारब्ध का दोष ज्यादा है ?”

प्रश्न = कर्म कितने प्रकार के होते हैं ? उनमें श्रेष्ठ कौन सा कर्म माना जाता है ?

कर्म मुख्यता तीन प्रकार के होते हैं १. संचित कर्म २. प्रारब्ध कर्म और ३.क्रियमाण कर्म। जैसे हम बैंक में पैसा जमा करते जाते हैं इस प्रकार काफी अर्से से (जमा करना) एकत्र होते होते संचित कर्म कहलाते हैं, उन संचित कर्मों में से जो कर्म फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं उसे प्रारब्धपढ़ना जारी रखें “प्रश्न = कर्म कितने प्रकार के होते हैं ? उनमें श्रेष्ठ कौन सा कर्म माना जाता है ?”

प्रश्न: संसार मै सही गलत क्या है

इस संसार मे सही गलत कुछ नही होता। सिर्फ कारण और परिणाम होता है। नियति होती है। तुमने आग में हाथ डाला तो जलेगा ही। तुम जल में तेरोगे नही तो डूबोगे ही। तुम जैसे दूसरे के साथ करोगे वैसा तुम्हारे साथ होगा। इसमे क्या सही और क्या गलत है? कुछ नही। सही गलत मनुष्यपढ़ना जारी रखें “प्रश्न: संसार मै सही गलत क्या है”

प्रश्न = क्या आपको लगता है कि सफलता के लिए भाग्य महत्वपूर्ण है ?

जो भी व्यक्ति इसका मर्म समझ गया, समझ लीजिए कि वह ईश्वर का नज़दीकी बन चुका है। इसके दो स्टेप हैं। 1-पहला स्टेप—वहाँ पहुँचने के लिए वर्षों के अवलोकन के बाद दो बातें समझ में आएँगी। पहली यह कि यदि भाग्य (डेस्टिनी/प्रारब्ध) है तो उसे प्राप्त करने के प्रयास होने लगते हैं। अगर किसी केपढ़ना जारी रखें “प्रश्न = क्या आपको लगता है कि सफलता के लिए भाग्य महत्वपूर्ण है ?”

प्रश्न = जिसके साथ जो भी अच्छा या बुरा हो तो यह उसके कर्मों का फल होता है। अगर इस हिसाब से मैं किसी के साथ बुरा करता हूँ तो मैं पापी कैसे हुआ ?

देखिए कर्म सिद्धांत के अनुसार देखें तो हम कह सकते हैं कि भगवान की शक्तियों के पास सबके कर्मों का खाता अलग अलग है। कर्मों का फल देने वाली परमेश्वर की शक्तियाँ (देवताएँ) हैं, आप या मैं नहीं। किसी को उसके कर्मों के फल-स्वरूप क्या सुख या दुःख कब और कैसे मिलता है, यह व्यवस्थापढ़ना जारी रखें “प्रश्न = जिसके साथ जो भी अच्छा या बुरा हो तो यह उसके कर्मों का फल होता है। अगर इस हिसाब से मैं किसी के साथ बुरा करता हूँ तो मैं पापी कैसे हुआ ?”

एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जप करने लगे ,

एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जप करने लगे , ” मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।” पंडितजी के पुछने पर बोले जब आपके चढाये जल भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा। पंडितजी बहुत लज्जित हुए।” कहानी सुनाकरपढ़ना जारी रखें “एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी गिराकर जप करने लगे ,”

शास्त्रों के अनुसार स्वर्ग या नर्क को गतियों से समझा जा सकता है।

शास्त्रों के अनुसार स्वर्ग या नर्क को गतियों से समझा जा सकता है। स्वर्ग और नर्क 2 गतियां हैं। आत्मा जब देह छोड़ती है तो मूलत: 2 तरह की गतियां होती हैं- 1. अगति और2. गति।. अगति : अगति में व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिलता है उसे फिर से जन्म लेना पड़ता है। 2. गतिपढ़ना जारी रखें “शास्त्रों के अनुसार स्वर्ग या नर्क को गतियों से समझा जा सकता है।”

प्रश्न = क्या कर्मों के फल से कोई बच सकता है ?

यह तो आधुनिक विज्ञान भी कहता है कि बिना कारण के कोई क्रिया नहीं होती, बिना क्रिया के कोई कर्म नहीं होता और बिना कर्म के कोई परिणाम (फल) नहीं होता। एक ही क्रिया से एक से अधिक कर्म भी होते हैं। अब प्रश्न यह उठता है कि मनुष्य बिना कर्म किये कैसे जी सकतापढ़ना जारी रखें “प्रश्न = क्या कर्मों के फल से कोई बच सकता है ?”

प्रश्न : मान लीजिये कि मैंने बहुत सारे पाप किये हैं और अब मैं एक नेक इंसान बनना चाहता हूँ लेकिन लोग मेरे पाप को याद दिलाकर मुझे शर्मिंदा करते हैं.

प्रश्न : मान लीजिये कि मैंने बहुत सारे पाप किये हैं और अब मैं एक नेक इंसान बनना चाहता हूँ लेकिन लोग मेरे पाप को याद दिलाकर मुझे शर्मिंदा करते हैं. कहते हैं कि सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को चली, तो मैं अपने आप को कैसे समझाऊँ ? ये संसार है यहाँ केपढ़ना जारी रखें “प्रश्न : मान लीजिये कि मैंने बहुत सारे पाप किये हैं और अब मैं एक नेक इंसान बनना चाहता हूँ लेकिन लोग मेरे पाप को याद दिलाकर मुझे शर्मिंदा करते हैं.”

शास्त्रों_मैं_सपनों_का_महत्व

सिगमंड फ्रायड ने पिछली सदी में सपनों की व्याख्या की थी, लेकिन हमारे शास्त्रों ने हजारों साल पहले इसे समझाया था। हमारे सपनों का महत्व और अर्थ क्या है। हमारे शास्त्रों के कण्व शंख में इनकी व्याख्या की गई है दिन की पहली तिमाही में सपने एक वर्ष में पूरे होते हैं यदि सपने दूसरीपढ़ना जारी रखें शास्त्रों_मैं_सपनों_का_महत्व

गेंदे के फूल के फ़ायदे

गेंदे का फूल केवल एक सुंदर फूल नहीं है।इसके अपार स्वास्थ्य लाभ हैं जो गांवों में हमारे बुजुर्गों को भी ज्ञात हैं। आइए नीचे गेंदे के कुछ लाभ देखें: 1- मिश्री के साथ सेवन करने पर पेशाब को नियमित करने में मदद करता है। 2- गेंदे की पंखुड़ियों का चूर्ण जब दही में मिलाया जातापढ़ना जारी रखें “गेंदे के फूल के फ़ायदे”

हमारे ऋषि-मुनियों ने इस निधि ध्यासन की प्रक्रिया में बहुत सी ऐसी बातें देखीं, अनुभव करीं और उनका साक्षात्कार किया। वो सोचीं नहीं, विचार नहीं किया, संशोधन नहीं किया; उन्होंने साक्षात्कार किया।

साक्षात्कार होने के बाद कुछ रहस्य ऐसे पता चले जो हम इन्द्रियों के द्वारा नहीं जान सकते वह, जिसका अनुभव इन्द्रियों रूपी साधन द्वारा नहीं हो सकता, उन्हें इन्द्रियातीत कहते हैं। ऐसे अनुभव को किसी साधन से नहीं जाना जा सकता, साधना से जाना जा सकता है। ऐसे ही कुछ इन्द्रियातीत अनुभव ऋषि-मुनियों को हुए।पढ़ना जारी रखें “हमारे ऋषि-मुनियों ने इस निधि ध्यासन की प्रक्रिया में बहुत सी ऐसी बातें देखीं, अनुभव करीं और उनका साक्षात्कार किया। वो सोचीं नहीं, विचार नहीं किया, संशोधन नहीं किया; उन्होंने साक्षात्कार किया।”

गुरुत्वाकर्षण और चोर पाश्चात्य वैज्ञानिक

इतना निश्चित है कि न्यूटन बहुत बडा चोर था जिसको बिल्ली और बच्चे के लिए अलग अलग दरवाजा चाहिये था, उसने गुरुत्वाकर्षण की खोज की, कुछ पल्ले नहीं पडता । कहते हैं न्यूटन ने सेब के फल को गिरते देखा और गुरुत्वाकर्षण का पता लगाया,,, एक सेब को गिरते देख लिया और पृथ्वी के अंदरपढ़ना जारी रखें “गुरुत्वाकर्षण और चोर पाश्चात्य वैज्ञानिक”

प्रश्न: वीर्य निकालने से शरीर कमजोर क्यों हो जाता है क्या शास्त्रों मै इसका वर्ण है?

वीर्य अर्थात् वीर या वीरत्व जिसको धारण करने से शरीर में वीरता और बल बुद्धि आयु यश स्वास्थ्य में वृद्धि हो वीर्य शरीर का अत्यंत आवश्यक अतिशुद्ध सार तत्व है जिसे बनने में महीनों व्यतीत हो जाते है साथ ही यह शरीर में जमा होते जाने की स्थिति में यह शरीर में प्रवाहित होकर शरीरपढ़ना जारी रखें “प्रश्न: वीर्य निकालने से शरीर कमजोर क्यों हो जाता है क्या शास्त्रों मै इसका वर्ण है?”

प्रश्न : क्या सामान्य हिन्दूओं को अपनी पूजा पद्धति और कुलदेवी देवता का भी ज्ञान नहीं है?

देखिए इंटरनेट, स्मार्टफोन के ज़माने में अगर किसी को उस चीज़ का ज्ञान नहीं है जो वो चाहता है या उसको होना चाहिए तो उससे बड़ा अकर्मण्य कोई नहीं । सदियों से ब्राह्मणों को दोष दिया जाता रहा है कि ब्राह्मण ने अपने तक ही ज्ञान रखा । पूजा पद्धति पर अपना अधिकार बनाये रखापढ़ना जारी रखें “प्रश्न : क्या सामान्य हिन्दूओं को अपनी पूजा पद्धति और कुलदेवी देवता का भी ज्ञान नहीं है?”